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स्‍वच्छ भारत समर इंटर्नशिप

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अगर आप कॉलेज स्‍टूडेंट हैं और इस गर्मी की छुट्टी में कुछ अच्‍छा करना चाहते हैं तो सरकार की स्‍वच्छ भारत समर इंटर्नशिप आपके लिए एक अच्‍छा मौका है। इस इंटर्नशिप से आप गांवों में सफाई और वहां लोगों को जागरुक करने में योगदान तो कर ही सकते हैं , साथ ही 10,000 रुपए से लेकर 2 लाख रुपए तक का कैश प्राइज भी जीत सकते हैं।   ' स्‍वच्छ भारत समर इंटर्नशिप- स्‍वच्‍छता के 100 घंटे ' को मिनिस्‍ट्री ऑफ ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट ने मिनिस्‍ट्री ऑफ ड्रिंकिंग वाटर एंड सैनिटेशन एवं युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय , भारत सरकार के साथ मिलकर लॉन्‍च किया है। इस इंटर्नशिप के तहत युवाओं को अपने कम से कम 100 घंटे ग्रामीण इलाकों में स्‍वच्‍छता से जुड़े कामों को देने होंगे। ये घंटे 1 मई से शुरू होकर 31 जुलाई 2018 के बीच होंगे। इस प्रोग्राम का उद्देश्‍य देशभर के युवाओं को स्‍वच्‍छता अभियान से जोड़ना है। इस समर इंटर्नशिप के लिए रजिस्‍ट्रेशन 15 जून तक कराया जा सकता है।   कौन कर सकता है यह इंटर्नशिप - कॉलेज या यूनिवर्सिटी में पढ़ने वाले स्‍टूडेंटस - कैडीडेट्स अपने घर और इंस्‍टीट्यूशन...

सम्मान एक ऐसी चीज है, जिसे प्रायोजित नहीं किया जाता। हर व्यक्ति चाहता है कि वह जिस कार्यक्षेत्र में कार्य करे वहाँ उसे पूरा-पूरा सम्मान मिले।

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यदि हम घर- परिवार  की बात करें तो हमारे परिवार में भी बहुत सारे सदस्य होते हैं लेकिन उनमें से हर कोई चाहता है कि परिवार में उसके निर्णय व राय का सभी सम्मान करें परंतु यह सब तभी सम्भव हो सकता है, जब आप स्वयं को इतना काबिल बनाएँ कि लोग स्वयं ही आपका सम्मान करने लगें।  सम्मान भी दो प्रकार का होता है- एक तो स्वत: सम्मान होता है और दूसरा  डर  या खौफ के कारण दिया जाने वाला सम्मान होता है। हमें हमारे आसपास दोनों ही प्रकार के व्यक्ति आसानी से मिल जाएँगे।  कई बार हम लोगों का सम्मान इसलिए करते हैं कि वह हमारे सम्मान के लायक होते हैं। उनमें वह प्रतिभा और काबिलियत होती है कि वे जहाँ भी रहते हैं, सबको अपना बना लेते हैं। इस प्रकार के व्यक्ति सम्मान के भूखे नहीं होते हैं बल्कि उनके लिए सम्मान नाम का तमगा कोई विशेष अहमियत नहीं रखता है।  दूसरे प्रकार के व्यक्ति वे होते हैं, जिन्हें सम्मान से बहुत लगाव होता है। उनका खौफ ही उतना होता है कि लोग उनके डर से या अपनी नौकरी बचाने के भय से उनका सम्मान करते हैं। ऐसा सम्मान कभी दिल से किया गया सम्मान नहीं होता है। इसे प्र...

राष्ट्रीय सेवा योजना , स्थापना दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं

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समाज सेवा के माध्यम से विध्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास का पावन उद्देश्य लेकर राष्ट्रीय सेवा योजना के नाम से महात्मा गांधी जन्मशताब्दी वर्ष 24 सितम्बर 1969  एक लौ जली | तब  से निरंतर विभिन्न नवाचारों में ढलते हुए युवाओं का एक सैलाब साथ लेकर, रास्ट्रीय सेवा योजना आज एक विशाल मशाल की भॉंति युवाओं के जीवन को रोशन कर नया जीवन प्रदान करती जा रही है ! महात्मा गाँधी चाहते थे कि छात्र देश के सामाजिक और आर्थिक अक्षमता के संबंध में, केवल चर्चा न करे बल्कि कुछ ऐसे रचनात्मक कार्य भी करे जिससे ग्रामीणों के जीवनस्तर को सामाजिक और आर्थिक दृष्टिकोण से उन्नत बनाया जा सके। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के प्रथम अध्यक्ष डॉ. राधाकृष्णन ने यह सिफारिश की थी कि शैक्षणिक संस्थाओं के छात्रों के माध्यम से राष्ट्रीय सेवा को प्रारंभ किया जाये जिससे छात्र और अध्यापकों के बीच सामंजस्य स्थापित हो। साथ ही शिक्षण संस्था और समाज परस्पर रचनात्मक कार्य करे। व्यक्तित्व विकास व समाज सुधार का यह कार्य रास्ट्रीय सेवा योजना के सिपाहियों के माध्यम से चल रहा है , नित नए आयाम स् थापित प्राप्त कर रहें  है...

शिक्षक दिवस की शुभकामना !आज मैं अपने शिक्षक से रुबरु कराते है

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प्रत्येक व्यक्ति चाहे वो आम हो या खास उसके निर्माण मै शिक्षक की जरुत पड़ती है शिक्षक अगर हमारे कुशल मार्गदर्शक के रुप मे मिल जाये तो सफलता की सीढियां चढते हुऐ अपने लक्ष्य को हाँसिल कर लेते है आज मै जो कुछ सफलता पाया है कुशल शिक्षक के बदौलत ! आज मैं अपने इन्ही शिक्षक से आप से रुबरु कराते है।ये सभी शिक्षक अपने क्षेत्र के  महारत हासिल है। ये शिक्षक हमे स्कुल मे नही हमारे साथ के मित्र है या हम इन महान व्यक्ती से जुड़े है। श्री मान अलोक कुमार सिह, सहायक निदेशक B.S.A.C.S. पटना (बिहार सरकार) इन्होने हमे आगे बढने की साथ ही , कई सामंजस स्थिती से निपटने के लिऐ हमे हौशला दिये !   श्री मान अलोक कुमार सिह सहायक निदेशक जी के साथ श्री नीरज कुमार,विधान पार्षद सह प्रवक्ता (jdu) ने मेरे अन्दर के जुनून जगा कर अनुभव का समुन्द्र बनाये है वे मेरे प्रेरेणा स्रोत और अभिभावक है उनसे मै कई बारीकियो को सिखा हुँ।आज कुछ सिखा तो मेँ सर के बदौलत ही उन्होने मुझे कई जिम्मेदारिया सौपा था।मेरे ख्याल से इन्होने मुझे जिम्मेदारिया ही नही बल्कि मुझे जीना सिखाया है।  कुमार कृष्ण,पत्रकार ,...

परिवर्तन

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परिवर्तन छोटा था पर नेक था वो थोड़ा नटखट पर परवाना था । छोटी उम्र में अपने परिवार के लिए कुछ करना था।वो कोलकाता के व्यस्त लोगो के बीच एक दिन वो अचानक कहता हे बँगला भाषा में अंकिल हमे ठंड लग रहा हे। सामने वाला छनभर के लिए सुन्न हो जाता है। एकटक उसे निहारते रह जाता है कोई परिवर्तन नहीं था लगा की कोई अपना है| वो उसके रूप को देख कर थोड़ा उसके दिल में प्यार उमर पड़ा जिसके कारण वो मुसकुरते हुए। तुम कुछ खायेगा।वो बोलता हां| मेरी माँ बोली जा भाग कोई काम कर और में निकल गया।कोई काज हे तो में करूँगा । इतना सुनते ही आशंकाओ का बदल घिरने लगा कही कुछ उच्च नीच ना होजाय।अपने साथ उसे ले जाकर खाना खाने के वाद उसे गर्म कपड़ा टोपी चपल का प्रवन्ध किया लगातार उसे संसार चलाने का सारा का सारा शव्द उसे एक साथ बता दिए   उसके प्रश्न के जवाब के लिए की आमी काज करवो के पूर्ति के लिए एक दुकान बाले को बोले की इसका ख्याल रखना। सच्चा था वो रिस्ता ढूढ लिया मामा कहता था । माहोल के अनुसार सम्बोधन करने लगा टेढ़ा मामा , दादु और चिना।अदभुत परिवर्तन ला दिया परिवेश में वो |मामा के लिये हर कार्य के लिए आतुर देखा।किसी भी...